चलो आज फिर
बीते दिनों का लुत्फ़ उठाते हैं,
कुछ पुराने किसे
फिर से दोहराते हैं,
उन्ही के संग बह जाते हैं,
वट पे डाल झूले की पींग
फिर से मचकते हे,
चलो आज फिर--
बारिश में भीग लेते हैं,
पानी में कागज की नाव
फिर से तिराते हैं,
चलो आज फिर--
यादें ताजा कर लेते हैं,
पुराने खत पढ लेते है,
कुछ फिर नये लिख देते हैं,
चलो आज फिर--
बेफिक्री की हँसी हंस लेते हैं,
भर पूर जिंदगी जी लेते हैं,
चलो आज फिर---
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