वो दिन फिर नही आएगा,
फिर न दोहराया जायेगा,
ना कोख में मारी जाओगी,
तुम बनजा सबल
वरना असको से नहला
दिया जायेगा,
कह दिया जायेगा
यह तो थी बेचारी अबला,
तोड़ दे वो जंजीरे जो
गहना बना पहना दिया है
सीता व सावित्री ने,
उतार दे, फाड़ दे
वो बदरंगी चादर,
कर दे इन
विचारो का सहार,वरना
तेरा सहार कर दिया जायेगा,
अबला ही रह जाएगी।
No comments:
Post a Comment