तुम सुनो तो कहूँ
कोई दूर से पुकारता,
फ़िज़ा में धुन
प्यार को छेड़ता,
मोहबत की ये दास्ता,
तुम सुनो तो कहुँ,
प्रीत का खामोश सफर,
लफ्जो की बस
चुपी सी लगी है ,
नजरो की सदा है ,
धडकनो की नाद पे ,
दिल की सुन ले दास्ता,
ढलती रात की ख़ामोशी में
अजीब सा नशा है,
तुम सुनो तो..
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