तुझ-सा हैं,पर
तुझ-सा बिलकुल भी नहीं
कोई हरकत ना
शरारत की कमी,
पर तेरे करीब होने के
हर अहसास की खामी ,
ख्वाबो से परे,
पलट हकीकत में
बिलकुल भी नहीं ,
तेरा अक्स ही तो हैं,
तुझ-सा हैं पर
तुझे-सा बिलकुल भी नहीं,
तेरा ही प्रतिबिंब,
हरदम साथ मेरे,
फिर भी एक खालीपन
भीतर मुझ में,
तुझ-सा हैं,पर
तुझ-सा बिलकुल नहीं।
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