Friday, 28 August 2020

तुझ- सा है पर तुझ- सा बिल्कुल नहीं

तुझ-सा हैं,पर 
तुझ-सा बिलकुल भी नहीं 
कोई हरकत ना 
शरारत की कमी,
पर तेरे करीब होने के 
हर अहसास की खामी ,
ख्वाबो से परे,
पलट हकीकत में
बिलकुल भी नहीं ,
तेरा अक्स ही तो हैं,
तुझ-सा हैं पर 
तुझे-सा बिलकुल भी नहीं,
तेरा ही प्रतिबिंब,
हरदम साथ मेरे,
फिर भी एक खालीपन 
भीतर मुझ में,
तुझ-सा हैं,पर 
तुझ-सा बिलकुल नहीं। 

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